देवप्रभा कुमारी 1, डॉ० अंकिता गुप्ता 2
1 शोधार्थिनी (पीएच.डी. शोध छात्रा), गृह विज्ञान, डॉ० भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा, उत्तर प्रदेश
Corresponding author: देवप्रभा कुमारी, E-mail: devprabha123@gmail.com
2 सहायक प्रोफेसर, पोषण विज्ञान, सतत शिक्षा विद्यापीठ, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Issue: Vol. 2 No. 3 (September 2026) – Anubodhan
प्राप्तिः 22 सितम्बर 2026 / स्वीकृतः 29 सितम्बर 2026 / प्रकाशित ऑनलाइन: 30 सितम्बर 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.123
Abstract
पृष्ठ भूमिः खाद्य उत्पाद भारत में द्वितीय स्थान पर सबसे अधिक विज्ञापित उत्पाद है और यह देश के प्रमुख तीन विज्ञापित उत्पादों में से एक है। जबकि कई कारक बच्चों के खाद्य व्यवहार एवं उनकी भोजन की पंसद को प्रभावित करते हैं।
उद्देश्यः किशोरों में विज्ञापित खाद्य एवं पेय पदार्थों की खपत को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन।
क्रिया विधिः शोध का डिजाइन क्रॉस अनुभागीय है जिसमें अलीगढ़ जिले के ब्लॉकों में स्थित विद्यालय के 11-18 वर्ष के 400 विद्यालयी छात्र छात्राओं पर अध्ययन किया गया। आँकडों को प्राप्त करने के लिये स्व निर्मित प्रश्नावली उपयोग में लायी गयी।
परिणामः शोध के परिणामों में पाया गया कि किशोरों में विज्ञापित खाद्य एवं पेय पदार्थों की खपत का औसत (Mean) व मानक विचलन (S.D.) लड़कों में 1.721±1.176 पाया गया। जबकि लड़कियों में 1.724±1.178 पाया गया। कुल लड़कों व लड़कियों का औसत (Mean) व मानक विचलन (S.D.) 1.712±1.167 पाया गया।
खाद्य पदार्थों की खपत के महत्वपूर्ण कारकों में देखा गया कि भोज्य पदार्थों का स्वादिष्ट होना, आकर्षित पैंकिंग, कम समय में जल्दी उपलब्ध व बनकर तैयार होने के कारण एवं सस्ता होने के कारणों में से भोज्य एवं पेय पदार्थों का स्वादिष्ट होना सबसे अधिक किशोरों में खपत को प्रभावित करता है।
निष्कर्षः निष्कर्ष में पाया गया कि 48 प्रतिशत लड़कियों की तुलना में 51 प्रतिशत लड़के विज्ञापित खाद्य एवं पेय पदार्थों के स्वादिष्ट होने के कारण प्रभावित होते है।
मुख्य शब्दः खाद्य विज्ञापन, किशोर, जंक फूड, कारक।
How to cite: Kumari, D. & Gupta, A. (2026). विद्यालय में अध्ययन करने वाले किशोर लड़कों एवं लड़कियों में विज्ञापित खाद्य एवं पेय पदार्थों की खपत को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन. Anubodhan, 2(3), 277–282. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.123