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ANUBODHAN

A Peer Reviewed Multidisciplinary Quarterly Research Journal

स्व-चेतना (Self-Consciousness) का तुलनात्मक विश्लेषण: बौद्ध अनात्मवाद, No-Ownership Theory, Self-Model Theory एवं Default Mode Network (DMN) के विशेष संदर्भ में

रघुनाथ पटेल

जे.आर.एफ., आई.सी.पी.आर. (JRF, ICPR), दर्शनशास्त्र विभाग, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्य प्रदेश

E-mail: raghunaathgmscjbp@gmail.com

IssueVolume 2 No. 2 (June 2026) Anubodhan

प्राप्तिः 16 जून 2026 / स्वीकृतः 28 जून 2026 / प्रकाशित: 30 जून 2026

DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n2.2026.073

Abstract

चेतना (Consciousness) तथा “स्व” (Self) की अवधारणा दर्शन एवं आधुनिक विज्ञान दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विमर्श का विषय रही है। कुछ पारंपरिक दार्शनिक परंपराएँ जहाँ आत्मा को स्थायी एवं स्वतंत्र सत्ता के रूप में स्वीकार करती हैं, वहीं बौद्ध दर्शन का “अनात्मवाद” सिद्धांत इस धारणा का निषेध करता है। बौद्ध दृष्टिकोण के अनुसार व्यक्तित्व पंचस्कंधों- रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार एवं विज्ञान का परिवर्तनशील समुच्चय है, जिसमें कोई नित्य एवं शाश्वत आत्मा विद्यमान नहीं होती। इसी प्रकार David Hume की “No-Ownership” अथवा “Bundle Theory” आत्मा को अनुभवों एवं संवेदनाओं के समूह के रूप में व्याख्यायित करती है। आधुनिक समय में हुए चेतना संबंधी अध्ययनों में प्रमुख रूप से Thomas Metzinger की “Self-Model Theory” यह प्रतिपादित करती है कि ‘Self’ मस्तिष्क द्वारा निर्मित एक पारदर्शी मानसिक मॉडल है, न कि कोई स्वतंत्र वास्तविक सत्ता। दूसरी ओर आधुनिक Neuroscience में Default Mode Network (DMN) पर हुए शोध यह संकेत करते हैं कि आत्म-संदर्भित चिंतन (Self-referential thinking) एवं आत्मबोध का संबंध मस्तिष्क के विशिष्ट न्यूरल नेटवर्कों से है।

   प्रस्तुत शोध-पत्र में बौद्ध अनात्मवाद, Hume की No-Ownership Theory, Metzinger की Self-Model Theory तथा DMN की अवधारणाओं का तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। अध्ययन में दार्शनिक, विश्लेषणात्मक, तुलनात्मक एवं अंतर्विषयक पद्धति का प्रयोग करते हुए यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि ‘स्व’ (Self) की पारंपरिक स्थायी अवधारणा को आधुनिक दर्शन एवं Neuroscience किस प्रकार पुनर्परिभाषित करते हैं। शोध का निष्कर्ष यह दर्शाता है कि (Self) कोई स्वतंत्र तत्वमीमांसक (Metaphysical) सत्ता न होकर अनुभवात्मक, प्रक्रियात्मक एवं न्यूरो-संज्ञानात्मक निर्माण है। इस प्रकार अध्ययन चेतना एवं आत्मबोध की समझ के लिए दर्शन और विज्ञान के मध्य एक महत्वपूर्ण अंतर्विषयक संवाद स्थापित करता है।

मुख्य शब्द (Keywords): अनात्मवाद चेतना, Self-Model Theory, No-Ownership Theory, Default Mode Network (DMN) आत्मबोध, न्यूरोसाइंस, पंचस्कंध

How to cite: Patel, R. (2026). स्व-चेतना (Self-Consciousness) का तुलनात्मक विश्लेषण: बौद्ध अनात्मवाद, No-Ownership Theory, Self-Model Theory एवं Default Mode Network (DMN) के विशेष संदर्भ में. Anubodhan, 2(2), 151–156. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n2.2026.073

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