ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का प्रभाव
डॉ॰ अरूण प्रताप सिंह
सहायक आचार्य, भूगोल विभाग, श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय, फाफामऊ, प्रयागराज
Abstract
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम भारत सरकार की एक व्यापक और बहुआयामी पहल है जिसका उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है। ग्रामीण भारत, जहाँ लगभग दो–तिहाई जनसंख्या निवास करती है, इस परिवर्तन की वास्तविक कसौटी है। ग्रामीण क्षेत्रों में लम्बे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और शासन सम्बन्धी सेवाओं की कमी रही है, जिसके कारण सामाजिक और आर्थिक विकास असमान बना रहा। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने इन्हीं खाइयों को पाटने का प्रयास किया है
डिजिटल इंडिया का दृष्टिकोण तीन मुख्य आधारों पर टिका है:
- डिजिटल अवसंरचना का विकास: जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर तक ब्रॉडबैंड नेटवर्क, सार्वजनिक वाई–फाई और मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार शामिल है।
- डिजिटल सेवाओं का सार्वभौमिक वितरण: जिससे नागरिकों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और वित्तीय सेवाओं तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पारदर्शी और त्वरित पहुँच मिल सके।
- डिजिटल सशक्तिकरण: जिसके तहत डिजिटल साक्षरता, स्थानीय भाषा में सामग्री, और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों पर इसका प्रभाव कई स्तरों पर दिखाई देता है। शिक्षा में ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कक्षाओं ने नई संभावनाएँ खोली हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में टेलीमेडिसिन और ई-हॉस्पिटल ने दूरस्थ गाँवों को विशेषज्ञ परामर्श और उपचार से जोड़ा है। कृषि क्षेत्र में ई-नाम (National Agriculture Market) और मोबाइल आधारित मौसम व बाजार सूचनाओं ने किसानों को बेहतर मूल्य और उत्पादन योजना की सुविधा दी है। साथ ही आधार आधारित बैंकिंग, यूपीआई और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) ने वित्तीय समावेशन को गति दी है, जिससे पारदर्शिता और भ्रष्टाचार में कमी आई है।
हालाँकि इन उपलब्धियों के साथ चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। कई दूरदराज़ इलाकों में अब भी स्थायी बिजली और हाई–स्पीड इंटरनेट का अभाव है। डिजिटल साक्षरता विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में सीमित है। साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता जैसे मुद्दों पर पर्याप्त जागरूकता नहीं है, जिसके कारण ग्रामीण उपयोगकर्ता धोखाधड़ी और डेटा चोरी के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। इस शोध पत्र में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के ग्रामीण क्षेत्रों पर बहुआयामी प्रभाव का गहन अध्ययन किया गया है। विश्लेषण से स्पष्ट है कि डिजिटल इंडिया ने ग्रामीण भारत में शासन की पारदर्शिता, सेवा वितरण की गति, और नागरिकों के अवसरों में उल्लेखनीय सुधार किया है। फिर भी कार्यक्रम की स्थिर सफलता के लिए निरंतर निवेश, स्थानीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री का विकास, साइबर सुरक्षा ढाँचे की मजबूती, और सामुदायिक भागीदारी अत्यावश्यक है।
डिजिटल इंडिया केवल तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक ताने–बाने को पुनर्गठित करने की प्रक्रिया है। यह न केवल सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक पहुँचा रहा है बल्कि ग्रामीण समाज को ज्ञान आधारित और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रहा है। यह कार्यक्रम ग्रामीण भारत के लिए अवसरों का नया द्वार है। यदि सरकार निजी क्षेत्र और समाज मिलकर मौजूदा चुनौतियों का समाधान करें, तो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम भारत को आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
मुख्य शब्द: डिजिटल, ई-गवर्नेंस
How to Cite: Singh, A. P. (2025). ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का प्रभाव. Anubodhan, 1(3), 86–104.