ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह
शोधार्थी, शिक्षाशास्त्र विभाग, दी० द० उ० गो० वि० वि०, गोरखपुर
Issue: Volume 1 No. 4 (December 2025) Anubodhan
Published: 31 December 2025
Abstract
मानव जीवन केवल भौतिक उन्नति या इन्द्रिय-सुख में लिप्त रहने के लिए नहीं हुआ अपितु, आत्मिक उन्नति, शांति और परम सत्य की प्राप्ति ही इसका परम लक्ष्य है। भारत के प्राचीन दर्शन में ध्यान को साधना का सर्वोपरि साधन माना गया है। ध्यान केवल मानसिक अभ्यास न होकर जीवन की दिशा और चेतना का परिष्कार है। महर्षि पतंजलि, अपने ग्रन्थ योगसूत्र में धारणा, ध्यान और समाधि को क्रमशः साधक की अंतःयात्रा के चरणों के रूप में विवेचित करते हैं। जब यह तीनों चरण परिपक्व रूप से साधक के अंतस में पल्लवित होते हैं, तब वह ष्संयमष् की अवस्था को प्राप्त होता है, जो अंततः ब्रह्म या परमात्मा के साक्षात्कार का द्वार खोलती है।
मुख्य शब्द: ध्यान योग के मार्ग, धारणा, ध्यान, समाधि, ब्रह्मानुभूति
How to cite: Singh, G. P. (2025). ध्यान योग के मार्ग: धारणा, ध्यान, समाधि एवं ब्रह्मानुभूति. Anubodhan, 1(4), 169–185. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v1n4.2025.040