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धार्मिक चेतना

डॉ० स्मिता कुमारी

सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर, अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, एम. एम. महिला कॉलेज, आरा, वी. के. एस. यू., आरा, बिहार

E-mail: smitakumari82@gmail.com

Issue: Vol. 2 No. 3 (September 2026) – Anubodhan

प्राप्तिः 19 सितम्बर 2026 / संशोधित: 24 सितम्बर 2026 / स्वीकृतः 26 सितम्बर 2026 / प्रकाशित ऑनलाइन: 28 सितम्बर 2026

DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.119

Abstract

धार्मिक चेतना धार्मिक भावना तथा अनुभूति की चेतना है। धार्मिक चेतना धर्म का प्राणतत्त्व है, जिसमें मानव व्यक्तित्व के ज्ञानात्मक, भावनात्मक तथा क्रियात्मक पक्षों का समावेश होता है। प्रस्तुत शोध-पत्र में धार्मिक चेतना के स्वरूप, उसके प्रमुख तत्वों तथा उसके दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक आधारों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में धार्मिक चेतना से संबंधित तीन प्रमुख दृष्टिकोणों- ज्ञान प्रधान, भावना प्रधान तथा संकल्प अथवा क्रिया प्रधान का आलोचनात्मक विवेचन किया गया है। ज्ञान प्रधान दृष्टिकोण धर्म में विवेक एवं बौद्धिक बोध को महत्त्व देता है, जबकि भावना प्रधान दृष्टिकोण श्रद्धा, आस्था, प्रेम, आत्मसमर्पण एवं धार्मिक अनुभूति को केंद्रीय मानता है। इसके विपरीत संकल्प प्रधान दृष्टिकोण धार्मिक आचरण, कर्म, पूजा एवं व्यवहार को धार्मिक चेतना का आधार मानता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि इनमें से किसी एक तत्व को धार्मिक चेतना का पूर्ण आधार मानना एकांगी दृष्टिकोण है। वास्तविक धार्मिक चेतना ज्ञान, भावना और क्रिया के समन्वित स्वरूप में अभिव्यक्त होती है। शोध-पत्र में रूडोल्फ ऑटो की ‘नुमिनस’ अवधारणा के माध्यम से धार्मिक चेतना के रहस्यात्मक एवं आध्यात्मिक पक्ष का भी विवेचन किया गया है। निष्कर्षतः धार्मिक चेतना एक समग्र मानवीय अनुभूति है, जो आध्यात्मिक बोध, आस्था, नैतिक आचरण तथा आंतरिक शांति और अभय की अनुभूति से संबद्ध है। धार्मिक चेतना धार्मिक भावना तथा अनुभूति की चेतना है। यह धर्म का प्राण है। इसका मुख्य केन्द्र व्यक्ति है। व्यक्ति ही सदैव धर्म विषय चेतना को प्राप्त करता है। यहां तक की अविकसित धर्म में भी व्यक्ति ही धर्म का आधार होता है। इसलिए धार्मिक चेतना में मानव व्यक्तित्व में निहित सभी तत्व ज्ञानात्मक, भावात्मक एवं संकल्पात्मक निहित है। इसमें श्रद्धा, आस्था, भाव, संवेग, इच्छा, क्रिया आदि तत्व विद्यमान रहते हैं।

मुख्य शब्दः धार्मिक चेतना, ज्ञानात्मक, भावनात्मक, संकल्पात्मक, क्रियात्मक, धार्मिक अनुभूति।

How to cite: Kumari, S. (2026). धार्मिक चेतना. Anubodhan, 2(3), 253–257. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.119

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