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ANUBODHAN

A Peer Reviewed Multidisciplinary Quarterly Research Journal

DOI: 10.65885/anubodhan (Crossref)

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

Vol. 1 No. 4 (December 2025)

स्वामी विवेकानंद जी के शिक्षा संबंधी विचारों का अध्ययन

लेखकः अनन्त कुमार
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 49-61
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.030

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

श्रीमद्भागवत महापुराण में सामाजिक एवं सांस्कृतिक समीक्षाः भारतीय ज्ञान परम्परा के परिप्रेक्ष्य में

लेखकः डॉ0 आचार्य अविनाश चन्द्र शुक्ल
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 62-70
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.031

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

हिन्दी साहित्य तथा भारतीय ज्ञान परम्परा में जीवन मूल्य

लेखकः डॉ०  संजीव कुमार
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 71-82
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.032

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

भारतीय दर्शन में प्रामाण्यवाद विमर्श: एक समीक्षात्मक विश्लेषण

लेखकः डॉ० हरि नारायण
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 100-111
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.035

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

सूर्यपुत्र रेवंत प्रतिमा एवं योद्धा प्रतिमा का तुलनात्मक अध्ययन (दुर्ग संभाग के सन्दर्भ में)

लेखकः डॉ० प्रशांत कुमार चौरे
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 112-116
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.036

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

अन्तर्पीढ़ी संघर्ष एवं संयुक्त परिवार का विघटनः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन (गोरखपुर जनपद में स्थित पिपरौली विकासखण्ड के खोरठा गाँव के विशेष सन्दर्भ में)

लेखकः अजय कुमार और प्रो0 अनुराग द्विवेदी
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 117-137
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.037

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

भगवद्गीता और अस्तित्वगत चिंता : अर्जुन विषाद का दार्शनिक पुनर्विश्लेषण

लेखकः डॉ॰ रेनू चौधरी
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 150-168
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.039

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

ध्यान योग के मार्ग: धारणा, ध्यान, समाधि एवं ब्रह्मानुभूति

लेखकः ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 169-185
DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.040

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Vol. 1 No. 4 (December 2025)

सन्देशप्रद लघुकथा-संग्रह: सुनऽ भाई साधो! (भोजपुरी-लघुकथाव्यंग्य समीक्षा)

लेखकः डॉ० वेद प्रकाश पाण्डेय
खण्ड 1, अंक 4 (दिसम्बर 2025)
पृष्ठः 186-187

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