नरेश कुमार 1 & डॉ० अश्वनी कुमार 2
1 शोध छात्र, तुलनात्मक धर्म एवं सभ्यता केंद्र, जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू
2 तुलनात्मक धर्म एवं सभ्यता केंद्र, जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू
E-mail: nareshbassay931@gmail.com
Issue: Vol. 2 No. 3 (September 2026) – Anubodhan
प्राप्तिः 12 जून 2026 / संशोधित: 24 जुलाई 2026 स्वीकृतः 28 जुलाई 2026 / प्रकाशित ऑनलाइन: 31 जुलाई 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.093
Abstract
नाथ परंपरा भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है, जिसनें योग, साधना और गुरु शिष्य परंपरा एवं सामाजिक समरसता के माध्यम से भारतीय संस्कृति को गहराई से अपना प्रभाव डाला है। भारत में नाथ पंथ के मठ केवल धार्मिक आराधना का ही केंद्र नहीं है बल्कि वे शिक्षा, योग साधना, सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और लोकपरम्पराओं के विस्तार तथा सामाजिक सेवा के प्रमुख स्थान भी रहे हैं। मध्यकाल युग से वर्तमान समय तक नाथ मठों ने भारतीय समाज में आध्यात्मिक चेतना के संवर्धन, नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा तथा सांस्कृतिक एकता के संरक्षण एवं सामाजिक समरसता को स्थायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे है। इस अध्ययन से यह भी स्पष्ट होता है कि नाथ मठ धार्मिक आस्था के केंद्र के साथ-साथ उन्होंने भारतीय संस्कृति के निरंतर विकास में भी अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है। इन मठों के माध्यम से योग परंपरा, लोकहित की भावना, सामाजिक और सांस्कृतिक आदर्शों को निरंतर प्रोत्साहन मिला है। समकालीन समय में भी नाथ मठ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत तथा नैतिक मूल्यों के संरक्षण और प्रसार के प्रमुख केंद्र के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
कुंजी शब्द: नाथ पंथ, मठ, योग परंपरा, भारतीय संस्कृति, समरसता।
How to cite: Kumar, N. & Kumar, A. (2026). भारत के प्रमुख नाथ मठों का ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन. Anubodhan, 2(3), 19–26. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.093