डॉ. राजेशकुमार सोसा
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, समाजशास्त्र विभाग, एल. आर. वलिया विनयं एवं पी. आर. मेहता कोमर्स कोलेज, भावनगर (गुजरात)
ई-मेल: RAJESHKUMAR.SOSA@gujgov.edu.in
Issue: Volume 2 No. 1 (March 2026) Anubodhan
प्राप्तिः 20 मार्च 2026 / स्वीकृतः 25 मार्च 2026 / प्रकाशितः 31 मार्च 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.033
Abstract
भारतीय आदिवासी में सामाजिक संगठन, संस्थाओं, मान्यताओं, संस्कृति, सांस्कृतिक प्रतिमानों, परम्पराओं, रीति-रिवाजों, व सिद्धांतों के आधार पर स्वच्छता की आदतों के प्रति आदिवासी जन समुदाय अपना दृष्टिकोण निर्मित करता है। इसके आधार पर स्वच्छता की आदतों का जीवन में पालन करता है। स्वच्छता के क्षेत्र में हुए संशोधनों के अध्ययन ज्ञात होता है कि गुजरात के आदिवासियों की कुछ प्रजातियॉ विलुप्तता की ओर है। साथ ही दैनिक जीवन में पर्याप्त स्वच्छता की कमी के कारण बीमारियों से उनकी औसत आयु भी कम हो रही है। संशोधनों से यह भी ज्ञात होता है कि गुजरात के आदिवासी समुदायों में मातृ मत्युदर व बाल मृत्युदर भी अधिक है। इसके अतिरिक्त आदिवासियों किशोरियॉ का शाला त्यागने का प्रतिशत भी अधिक है। आदिवासी समुदाय की आर्थिक स्थिति भी अपेक्षाकृत कमजोर है।
प्रस्तुत शोध में नवसारी जिले के आदिवासी किशोरियों में दैनिक स्वच्छता की जानकारी व व्यवहार में परिवर्तन का अध्ययन के साथ साथ पर्याप्त स्वच्छता न बरतने पर उनके जीवन पर इसके प्रभावों का अध्ययन किया गया। यह अध्ययन गुजरात के आदिवासियों हेतु स्वच्छता एवं स्वास्थ्य शिक्षा की प्रभावी नीति बनाने में सहायक सिद्ध होगा। साथ ही ग्रामीण आदिवासियों की संस्कृति में स्वच्छता के नियम, कुरूतियॉ, व्यवहार व इससे जुड़ी भ्रांतियों की जानकारी का उपयोग सकारात्मक पक्षों को प्रोत्साहित करने एवं नकारात्मक पक्षों को मिटाने में किया जा सकता है।
प्रस्तुत शोध का उद्देश्य गुजरात राज्य के नवसारी जिले के आदिवासी किशोरियों के जन-जीवन में स्वच्छता के प्रभाव का अध्ययन करना है। साथ ही अध्ययन क्षेत्र में आदिवासी किशोरियों के जीवन में दैनिक स्वच्छता की जानकारी व व्यवहार में परिवर्तन का अध्ययन के साथ साथ पर्याप्त स्वच्छता न बरतने पर उनके जीवन पर इसके प्रभावों का अध्ययन करना है। अध्ययन के उदेश्य में गुजरात के नवसारी जिले के आदिवासी किशोरियों के जीवन में अस्वच्छता की समस्या के कारको अध्ययन करना। अस्वच्छता के कारण उत्पन्न समस्याऐं – सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक व शारीरिक क्षति का अध्ययन करना। समस्याओं के कारकों के आधार पर संभावित हल ढूंढने का प्रयास करना। स्वच्छता के लिए शासन के द्वारा किये जा रहे प्रयासो व रणनीति का अध्ययन करना एवं उचित सुझाव प्रस्तुत करना। अतः शोध में यह सिद्ध होता है कि कर्ता परिस्थिति एवं प्रेरणा के संयुक्त प्रयास से ग्रामीण आदिवासी किशोरियों में स्वच्छता के प्रति सामाजिक परिवर्तन दृष्टिगत हुआ है जो कि शासन के सफल प्रयासों का परिणाम है।
How to cite: Sosa, R. (2026). आदिवासी महिला के जीवन में स्वच्छता का प्रभाव नवसारी जनपद के सन्दर्भ में समाजशास्त्रीय अध्ययन. Anubodhan, 2(1), 344–350. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.033