दीपिका तिवारी1 और पीयूष दत्त मिश्रा2
1शोधार्थी, उ. प्र. राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज E-mail: dipikatiwari2001@gmail.com
2शोधार्थी, उ. प्र. राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज E-mail: piyushdatt1798@gmail.com
Issue: Volume 2 No. 1 (March 2026) Anubodhan
प्राप्तिः 28 मार्च 2026 / संशाधित 29 मार्च 2026 / स्वीकृतः 29 मार्च 2026 / प्रकाशितः 31 मार्च 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.030
Abstract
भारत एक बहुसंस्कृति व बहुधार्मिक देश है। विकसित भारत @2047 भारत सरकार का समग्र विजन है। इसका उद्देश्य समावेशी विकास, नवाचार सुशासन और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित है। यह सामाजिक आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में सुधार करना है ताकि सभी नागरिकों के लिए समृद्धि निश्चित हो सके। जिसकी आध्यात्मिक परंपराएं शिक्षा सामाजिक व्यवहार और नैतिक संरचनाओं को सदियों से प्रभावित करती रही है। अर्थात वर्ष 2047 में जब प्रत्येक भारतवासी आजादी के समय वर्ष में प्रवेश करेगा तब भारत एक विकसित राष्ट्र होगा इस दृष्टि से विकसित भारत @2047 की दृष्टि से ऐसी परिकल्पना की गई है, जो भौतिक चेतन ज्ञान कौशल मूल्य से संपन्न हो और शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास जैसे नैतिक, बौद्धिक, भावनात्मक सामाजिक तथा आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देना है और सुनिश्चित करना है कि धार्मिक नैतिकता छात्रों के समग्र विकास, सामाजिक नैतिक आध्यात्मिक बौद्धिक भावनात्मक पर किस प्रकार प्रभाव डालती है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि धार्मिक नैतिकता छात्रों में सत्य, अहिंसा, करुणा, अनुशासन, सहिष्णुता, आत्मनियंत्रण, जिम्मेदारी और राष्ट्रहित जैसे मूल्यों को विकसित कर सकती है। जो सार्वभौमिक नैतिकताओं पर आधारित है जो सभी धर्म में समान रूप से विद्यमान है। कोई भी देश हो उसके भविष्य वहां के छात्र होते हैं इसलिए उनके समग्र विकास बहुत ही आवश्यक है। क्योंकि नीव जितनी मजबूत होती है मकान उतना ही अच्छा व टिकाऊ होता है इसलिए छात्र का विकास होगा तभी देश विकसित होगा। अतः निष्कर्ष यह है निकलता है कि यदि विकसित भारत 2047 तक धार्मिक नैतिकता को एक जीवन आधारित और मूल्य आधारित दृष्टिकोण से विद्यालय शिक्षा से समाहित किया जाए तो यह 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवा में धार्मिक नैतिकता, छात्रों में करुणा, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा संयम, कर्तव्यपरायणता तथा राष्ट्रहित जैसी मूल प्रवृत्तियों का विकास कर सकती है और भावी युवा पीढ़ी को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है, जिससे भारत का विकास होगा।
मुख्य बिंदुः विकसित भारत @ 2047, धार्मिक, नैतिकता, नई शिक्षा नीति 2020
How to cite: Tiwari, D. & Mishra, P. D. (2026). विकसित भारत 2047 के संदर्भ में छात्रों के समग्र विकास पर धार्मिक नैतिकता के प्रभाव पर एक अध्ययन. Anubodhan, 2(1), 311–317. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.030