डॉ0 संजय कुमार कुशवाहा
असिस्टेंट प्रोफेसर, प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज
ई-मेल: skkushavaha@allduniv.ac.in
Issue: Volume 2 No. 1 (March 2026) Anubodhan
प्राप्तिः 21 मार्च 2026 / स्वीकृतः 29 मार्च 2026 / प्रकाशितः 31 मार्च 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.034
Abstract
मध्य गंगा मैदान का प्राचीन काल से ही मानव को उपलब्ध संसाधनों से अपनी ओर आकर्षित करता रहा है, वर्तमान समय में इनके अवशेष टीले एवं खंडहर के रूप में प्राप्त होते हैं। प्रस्तुत लेख में ऐसे ही पुरास्थलों से प्राप्त कलात्मक पुरावशेषों को आधार बनाकर क्षेत्र विशेष की ऐतिहासिक विरासत और कला वैभव को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। मध्य गंगा मैदान में स्थित पुरास्थल प्रहलादपुर कोट, जिसका उत्खनन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर ए. के. नारायण के निर्देशन में टी. एन. राय एवं बी. पी. सिंह के द्वारा 1963 ईस्वी में करवाया गया था। इस पुरास्थल का इतिहास लगभग प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व में समाप्त हो जाता है इसके आगे के इतिहास की जानकारी हेतु प्रहलादपुर पुरास्थल के 5 किलो की परिधि में सर्वेक्षण का कार्य किया गया। परिणामस्वरूप तीन पुरास्थल, प्रहलादपुर शिवाला, मन्नी पट्टी चट्टी और करजरा कोट प्रकाश मे आये। इन पुरास्थलों से बहुत से पुरावशेष प्राप्त हुए, जिसमें मंदिर स्थापत्य, मूर्तियॉ, टेराकोटा की बनी कलाकृतियॉ, मृदभाण्ड, मनके, खेल-खिलौने इत्यादि की प्राप्ति हुई है जो मध्य गंगा मैदान के कला वैभव को बढाने के साथ-साथ पुरातात्त्विक एवं सास्कृतिक इतिहास में नवीन अध्याय जोडने का काम करेगें। प्रहलादपुर शिवाला में एक मंदिर का अवशेष है जिसके द्वार के ऊपर 10 पंक्तियों के लेख की भी प्राप्ति हुई है, जिसमें मूल स्थान का नाम, सन् एवं बनारस के नाम का उल्लेख है, जो इस पुरास्थल एवं क्षेत्रीय इतिहास की महत्ता को ऐतिहासिक विरासत की पटल पर स्थापित करेगा।
How to cite: Kushavaha, S. K. (2026). मध्य गंगा मैदान का कला वैभव एवं पुरातत्त्व (नवीन सर्वेक्षण के आलोक में). Anubodhan, 2(1), 351–366. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.034