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कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दौर और हिंदी भाषा का भविष्य

ब्लेस्सनराजू (Blesssanraju)

शोधार्थी, हिंदी विभाग, केरल विश्वविद्यालय, तिरुवनंतपुरम, केरल

E-mail: blessanraju97@gmail.com

IssueVol. 2 No. 3 (September 2026) – Anubodhan

प्राप्तिः 10 अगस्त 2026 / स्वीकृतः 20 अगस्त 2026 / प्रकाशित ऑनलाइन: 26 अगस्त 2026

DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.099

Abstract

प्रस्तुत शोध-आलेख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और हिंदी भाषा के परस्पर अंतःसंबंधों, अनुप्रयोगों, संभावनाओं तथा चुनौतियों का एक समालोचनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इक्कीसवीं सदी में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के द्रुत विस्तार ने भाषा के स्वरूप और उसके प्रसार की पद्धतियों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। बहुभाषी भारतीय समाज में हिंदी को एआई आधारित प्रौद्योगिकियों से जोड़ना केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि डिजिटल समानता और सामाजिक सशक्तीकरण का माध्यम है। यह आलेख शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेस, मशीन अनुवाद, वाचिक परंपरा के संरक्षण और साहित्यिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के योगदान की पड़ताल करता है। साथ ही, डेटासेट की कमी, हिंग्लिश का प्रभाव, भाषाई जटिलताएँ और साहित्य में मानवीय संवेदना के ह्रास जैसे ज्वलंत मुद्दों का विश्लेषण करता है। अंततः आलेख यह प्रतिपादित करता है कि तकनीकी दक्षता और मानवीय चेतना के संतुलित समन्वय से ही हिंदी का वैश्विक और स्थायी भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

मुख्य शब्द: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हिंदी भाषा, डिजिटल समानता, मशीन अनुवाद, ज्ञान-परंपरा, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP), साहित्यिक अनुसंधान, तकनीकी चुनौतियाँ।

How to cite: Blesssanraju. (2026). कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दौर और हिंदी भाषा का भविष्य. Anubodhan, 2(3), 60–63. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n3.2026.099

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