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ANUBODHAN

A Peer Reviewed Multidisciplinary Quarterly Research Journal

डॉ. भीमराव अम्बेडकर का मानवतावादी धर्म

डॉ. संतोष कुमार

असिस्टेन्ट प्रोफेसर (दर्शनशास्त्र), द्रौपदी देवी विन्ध्याचल महाविद्यालय, सिंहोरवाँ अहिरौली, गोरखपुर

ई-मेल: santoshmauryagorakhpur@gmail.com

IssueVolume 2 No. 1 (March 2026) Anubodhan

प्राप्तिः 20 मार्च 2026 / स्वीकृतः 26 मार्च 2026 / प्रकाशितः 31 मार्च 2026

DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.042

Abstract

इस लेख के माध्यम से डॉ. अम्बेडकर के मानवतावादी विचारों के दृष्टिकोण के संदर्भ में संगृहीत किया गया है। डॉ. अम्बेडकर को एक समूह या वर्ग का ही उद्धार करने से सम्बन्धित नहीं समझा जाना चाहिए बल्कि उनके द्वारा स्त्री-पुरुष समानता, किसानों के उद्धार के संदर्भ में, शिक्षा, धर्म, राजनीतिक सुधार, कानून का शासन आदि जैसे अपने विचारों को डा. अम्बेडकर ने व्यवहारिक धरातल पर लागू करने का प्रयास किया अतः उनके सभी कार्य समाज में समता बनाने, सामाजिक संघर्ष का आधार मानवतावादी है। बाबा साहेब के किए गये कार्य सर्वसमाज, सभी वर्ग के हित में किये गये हैं।

बीज शब्दः समाज सुधारक, जातिविहीन समाज, स्त्री शिक्षा, स्त्री-पुरुष समानता, मानवतावादी धर्म, समानता

How to cite: Kumar, S. (2026). डॉ. भीमराव अम्बेडकर का मानवतावादी धर्म. Anubodhan, 2(1), 453–457. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.042

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