रवि रंजन कुमार
सीनियर रिसर्च फेलो (यू० जी० सी०), दर्शनशास्त्र विभाग, नव नालन्दा महाविहार, (सम-विश्वविद्यालय), संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार, नालन्दा, बिहार
E-mail: raviraj48162907@gmail.com
Issue: Volume 2 No. 2 (June 2026) Anubodhan
प्राप्तिः 16 जून 2026 / संशोधित 24 जून 2026 / स्वीकृतः 25 जून 2026 / प्रकाशित ऑनलाइन: 27 जून 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n2.2026.066
Abstract
मानव सभ्यता के इतिहास में गौतम बुद्ध को ऐसे दार्शनिक, चिंतक और नैतिक शिक्षक के रूप में स्मरण किया जाता है, जिन्होंने मानवीय जीवन को अज्ञान, दुःख, हिंसा, अन्याय और भेदभाव से मुक्त करने के लिए एक समग्र शिक्षा-दर्शन प्रस्तुत किया। भारतीय दर्शन के इतिहास में बौद्ध नैतिक दर्शन का विशिष्ट स्थान है। यह नितान्त यथार्थपरक एवं व्यवहारिक धर्म दर्शन है। महात्मा बुद्ध ने अपने उपदेशों का न केवल सैद्धान्तिक रूप में विवेचन किया बल्कि स्वयं सत्य की अनुभूति को यथार्थ धरातल पर रखते हुए अपने सुख और शान्ति की तनिक चिन्ता न करते हुए राजभवन के सुख वैभव को त्याग कर सम्पूर्ण मानवता को विश्वबन्धुत्व, करुणा, समता, अहिंसा एवं निष्काम कर्मयोग का संदेश दिया। भगवान बुद्ध भारतीय जनमानस के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण मानव जाति के लिए महान वरदान थे। उन्होंने हमेशा दुःख के सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न दुःख की समाप्ति और निरोध की ओर ले जाने वाले मार्ग पर चर्चा की। बौद्ध दर्शन को पूर्ण परम ज्ञान के रूप में जाना जाता है। बुद्ध ने हमें सिखाया कि परम ज्ञान प्राप्त करना हमारे अभ्यास या साधना का मुख्य उद्देश्य होता है।
मुख्य शब्दः अज्ञान, अहिंसा, नैतिक, निष्काम, विश्वबन्धुत्व, परम ज्ञान।
How to cite: Kumar, R. R. (2026). बुद्ध के शिक्षा दर्शन में नैतिकता और समभाववादी दृष्टि का दार्शनिक विश्लेषण. Anubodhan, 2(2), 92–96. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n2.2026.066