डॉ0 कुसुम कुमारी
612/P, हनुमन्तपुरम् द्वितीय, फैजुल्लागंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश-226020
ई-मेल: amarnathkusum1980@gmail.com
Issue: Volume 2 No. 1 (March 2026) Anubodhan
प्राप्तिः 27 मार्च 2026 / संशोधितः 30 मार्च 2026 / स्वीकृतः 31 मार्च 2026 / प्रकाशितः 31 मार्च 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.044
Abstract
भारतीय ज्ञान परम्परा विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्ध परम्पराओं में से एक है, जिसमें जीवन के विविध आयामों- दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, योग एवं आध्यात्म, का समन्वित स्वरूप मिलता है। इस परम्परा में आयुर्वेद को जीवन-विज्ञान के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य वेदों में निहित आयुर्वेदिक सिद्धान्तों का विश्लेषण करते हुए यह प्रतिपादित करना है कि प्राचीन वैदिक साहित्य में स्वास्थ्य, दीर्घायु, रोग-निवारण तथा समग्र जीवन-शैली से सम्बन्धित वैज्ञानिक दृष्टिकोण विद्यमान है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद में चिकित्सा, औषधि, त्रिदोष सिद्धान्त, शरीर रचना तथा स्वास्थ्य संरक्षण से सम्बन्धित अनेक सन्दर्भ उपलब्ध होते हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति न होकर समग्र जीवन-शास्त्र है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी के रोग का शमन करना है।
प्रमुख कूटशब्दः भारतीय ज्ञान परम्परा, निरोगता, दीर्घायुष्य, तेज, ज्योति, बल, शरीरांग, त्रिदोषवाद।
How to cite: Kumari, K. (2026). भारतीय ज्ञान परम्पराः वेदों में निहित आयुर्वेद विज्ञान. Anubodhan, 2(1), 469–474. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.044