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ANUBODHAN

A Peer Reviewed Multidisciplinary Quarterly Research Journal

DOI: 10.65885/anubodhan (Crossref)

भारतीय दर्शन का उद्गम

डॉ0 ऋषिका वर्मा

सहायक आचार्य, दर्शन विभाग, हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल, उत्तराखण्ड, E-mail: rishika.verma75@gmail.com

Abstract

भारतीय दर्शन का उद्गम अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और बहुआयामी है। इसका विकास मानव जीवन के मूल प्रश्नों यथा जीवन, जगत्, आत्मा, ईश्वर और मोक्ष के चिंतन से हुआ है। भारतीय दर्शन केवल बौद्धिक विचारधारा नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति भी है। इसकाा आरंभ वैदिक काल से माना जाता है, जहाँ मानव ने प्रकति, देवताओं और आत्मिक सत्य को समझने का प्रयास किया। भारतीय दर्शन का मूल स्त्रोत वेद हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में दार्शनिक चिंतन के प्रारंभिक बीज मिलते हैं। प्रारंभ में वेदों में कर्मकांड और देवपूजा का प्रधान स्थान था, किन्तु धीरे-धीरे चिंतन का स्तर गहराता गया। इसी गहन चिंतन से उपनिषदों की रचना हुई, जिन्हें भारतीय दर्शन का आधार स्तंभ कहा जाता है। उपनिषदों में ब्रह्म, आत्मा, माया और मोक्ष जैसे गूढ़ दार्शनिक सिद्धान्तों का विवेचन मिलता है। ’अहं ब्रह्मास्मि’ और तत्त्वमसि जैसे महावाक्य आत्मा और ब्रह्म की एकता को प्रतिपादित करते हैं।
वैदिक दर्शन के साथ-साथ श्रमण परम्परा से भी भारतीय दर्शन का विकास हुआ। इसी परंपरा से बौद्ध और जैन दर्शन का उद्भव हुआ। भगवान बुद्ध ने दुःख तृष्णा और निर्वाण की अवधारणा प्रस्तुत की, जबकि जैन दर्शन ने अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह पर विशेष बल दिया। इन दर्शनों ने वैदिक कर्मकाण्ड का विरोध करते हुए नैतिकता और आत्मशुद्धि को प्रमुख स्थान दिया। कालांतर में भारतीय दर्शन छह आस्तिक दर्शनों- न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत के रूप में विकसित हुआ। इन दर्शनों ने तर्क, ज्ञान, साधना और मोक्ष के विभिन्न मार्ग प्रस्तुत किए। वेदान्त दर्शन विशेष रूप से अद्वैत दर्शन, विशिष्टाद्वैत और द्वैत के माध्यम से व्यापक रूप में विकसित हुआ। इस प्रकार भारतीय दर्शन का उद्गम विविध परंपराओं, चिंतनधाराओं और जीवनानुभवों का परिणाम है। यह दर्शन मानव का सत्य की खोज, आत्मज्ञान और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है तथा आज भी मानव जीवन को दिशा देने में सक्षम है।
बीज शब्दः भारतीय दर्शन, ज्ञान, मोक्ष, अध्यात्मवाद, तत्त्वमीमांसा, दुःख एवं ज्ञान

How to cite: Verma, R. (2025). भारतीय दर्शन का उद्गम. Anubodhan, 1(4), 83–92. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v1n4.2025.033

DOI: 10.65885/anubodhan.v1n4.2025.033

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