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ANUBODHAN

A Peer Reviewed Multidisciplinary Quarterly Research Journal

भारतीय ज्ञान परंपरा और यूनानी ज्ञान परंपरा का विश्लेषणात्मक अवलोकन

डॉ. संदीप कुमार चौरसिया

अकादमिक परामर्शदाता, इग्नू लखनऊ केंद्र, लखनऊ

ई-मेल: yogiskc@gmail.com

IssueVolume 2 No. 1 (March 2026) Anubodhan

प्राप्तिः 30 मार्च 2026 / स्वीकृतः 31 मार्च 2026 / प्रकाशितः 31 मार्च 2026

DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.050

Abstract

भारतीय और यूनानी ज्ञान परंपराएँ विश्व की दो प्रमुख दार्शनिक एवं वैज्ञानिक परंपराएँ हैं, जिन्होंने मानव सभ्यता के वैचारिक, नैतिक और वैज्ञानिक विकास को गहराई से प्रभावित किया। भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार ‘ऋत’, ‘सत्य’ और ‘धर्म’ जैसे सिद्धांतों पर टिका है, जहाँ ज्ञान का उद्देश्य केवल बाह्य जगत का विश्लेषण नहीं, बल्कि आत्मा और ब्रह्म के संबंध का बोध है। इसके विपरीत यूनानी ज्ञान परंपरा ने तर्क, विवेक, और अनुभव पर आधारित वस्तुगत विश्लेषण को ज्ञान का केंद्र बनाया। सुकरात, प्लेटो और अरस्तू जैसे दार्शनिकों ने ज्ञान को विवेचनात्मक और वैज्ञानिक पद्धति से परिभाषित किया, जबकि भारतीय परंपरा ने ध्यान, योग और आत्मानुभव को प्रमुख साधन माना। यह शोधपत्र दोनों परंपराओं के ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, नैतिकता, और शिक्षा के आयामों का विश्लेषणात्मक अवलोकन प्रस्तुत करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जहाँ भारतीय दृष्टिकोण समग्र (holistic) है, जो भौतिक और आध्यात्मिक दोनों को एकीकृत करता है,  वहीं यूनानी दृष्टिकोण विश्लेषणात्मक (analytical) है, जो वस्तुगत सत्य की खोज पर केंद्रित है। दोनों परंपराओं में मानवता, नैतिकता और विवेक की समान भावना विद्यमान है। भारतीय ज्ञान का लक्ष्य मोक्ष या आत्मसाक्षात्कार है, जबकि यूनानी परंपरा में ‘Eudaimonia’ अर्थात् उत्कृष्ट जीवन की प्राप्ति ही अंतिम लक्ष्य है। समकालीन संदर्भ में, जब आधुनिक विज्ञान अत्यधिक भौतिकतावादी होता जा रहा है, तब भारतीय परंपरा का आध्यात्मिक दृष्टिकोण और यूनानी परंपरा की तर्कसंगतता,  दोनों का संतुलन मानव समाज के लिए आवश्यक है। अतः भारतीय और यूनानी ज्ञान परंपराएँ न केवल समानांतर हैं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक भी हैं; एक अंतःप्रेरणा देती है तो दूसरी विवेक की दिशा दिखाती है।

मुख्य शब्द: भारतीय ज्ञान परंपरा, यूनानी दर्शन, तर्कशास्त्र, आत्मबोध, विश्लेषणात्मक दृष्टि, नैतिकता

How to cite: Chaurasia, S. K. (2026). भारतीय ज्ञान परंपरा और यूनानी ज्ञान परंपरा का विश्लेषणात्मक अवलोकन. Anubodhan, 2(1), 532–543. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.050

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