महात्मा गाँधी का आरोग्य दर्शन: एक विमर्श
डॉ० सुशील कुमार
पूर्व शोध छात्र, दर्शनशास्त्र विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज
Issue: Volume 1 No. 1 (March 2025) Anubodhan
Published: 31 March 2025
Abstract
पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति मानव जीवन का लक्ष्य है और उसकी प्राप्ति का माध्यम ‘स्वस्थ शरीर’ है क्योंकि स्वस्थ शरीर पर ही साधक, श्रवण, मनन, निदिध्यासन आदि को करने में समर्थ होता है। अतः स्वस्थ शरीर को ही जीवन की सर्वोत्तम सम्पत्ति माना गया है।
बीज शब्दः आरोग्य दर्शन, गाँधी, स्वस्थ शरीर
How to Cite: Kumar, S. (2025). महात्मा गाँधी का आरोग्य दर्शन: एक विमर्श. 1(1), 61–74.