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ANUBODHAN

A Peer Reviewed Multidisciplinary Quarterly Research Journal

वासुदेव शरण अग्रवाल कृत भारत की मौलिक एकता: एक अवलोकन

डॉ॰ मल्लिका मंजरी

असिस्टेंट प्रोफेसर, स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, तिलकामाँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार, E-mail: mallikatmbu@gmail.com

Issue: Vol. 1 No. 3 (September 2025) – Anubodhan

Published: 30 September 2025

Abstract

अवलोकित रचना मूलतः 1954 ई0 में भारतीय भंडार, इलाहाबाद से प्रकाशित हुई थी। विभाजन के प्रायः छः वर्ष बाद भारतीय एकत्व पर अग्रवाल का यह लेखन बहुत मायने रखता है। अग्रवाल विभाजन की त्रासदी के साक्षी थे। स्वतंत्रता मिलते-मिलते देश का बड़ा हिस्सा देश से टूट गया। इसकी बड़ी वजह धार्मिक-सांप्रदायिक अतिवाद था और यह दोनों पक्षों (हिन्दू-मुस्लिम) से था। तनाम चेष्टाओं के बाद भी हमारे शीर्ष नेता न सिर्फ इस अतिवाद को नियंत्रित करने में बल्कि अंततः विभाजन रोकने में भी विफल रहे। उस त्रासद विभाजन के बाद भी भारत को बहुजातीय, बहुभाषीय व बहुराष्ट्रीयता वाले देश के रूप में चित्रित करने वाले महानुभावों की कमी न थी। यदा-कदा वे उस विविधता को पृथकता के रूप में चित्रित करते रहते थे। विशेषतः उत्तर-दक्षिण के विवाद के संदर्भ मे। ऐसे में इस पुस्तक का प्रणयन महत्त्वपूर्ण था क्योंकि इसमें भारत में व्याप्त बहुजातीयता, बहुभाषा, बहुअस्मिता व बहुसंस्कृति आदि सारे अवांतर अन्तर्विरोधों के बावजूद उनमें अन्तर्निहित एकत्व भाव को उभारा गया है।

How to Cite: Manjari, M. (2025). वासुदेव शरण अग्रवाल कृत भारत की मौलिक एकता : एक अवलोकन. Anubodhan, 1(3), 134–141.

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