कु. नित्या गुरुंग1 और प्रो. सुषमा पाण्डेय2
1शोधार्थी (UGC JRF), 2आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर
Issue: Volume 2 No. 1 (March 2026) Anubodhan
प्राप्तिः 25 मार्च 2026 / स्वीकृतः 29 मार्च 2026 / प्रकाशितः 31 मार्च 2026
DOI: https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.039
Abstract
भारतीय ज्ञान परंपरा हमेशा से मात्र ज्ञान अर्जन तक सीमित नहीं रही है, अपितु यह मानव निर्माण और समाज के प्रति व्यक्ति में सामाजिक उत्तरदायित्व की चेतना को जगाए रखने में कार्यरत है। भारतीय गुरुकुल प्रणाली में गुरु-शिष्य परंपरा के संबंध में शिक्षा को एक आध्यात्मिक साधना का रूप दिया है | जहां धर्म, सत्य, अहिंसा और मानव कल्याण जैसे मूल्यों को जीवन का आधार मानकर बालक को शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाता है। वर्तमान काल में वैश्वीकरण और तकनीकी विकास ने शिक्षा के स्वरूप को बदल कर रख दिया है, किंतु मूल्य आधारित भारतीय शिक्षा परंपरा की आवश्यकता आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं| प्रस्तुत अध्ययन में यह विश्लेषण किया गया है कि भारतीय शिक्षक शिक्षण संस्थान किस प्रकार से भारतीय ज्ञान प्रणाली के मूल्यों को आधुनिक शिक्षण प्रक्रिया में समाहित कर सकते हैं। प्रस्तुत अध्ययन परंपरा और आधुनिकता के मध्य सेतु निर्माण की संभावनाओं को तलाशता है ताकि, शिक्षा मात्र कौशल तक सीमित न रहकर बौद्धिक, संवेगिक, मानसिक, आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक गुणों का भी संवाहक बने। अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक शिक्षा संस्थान मात्र ज्ञान प्रदाता नहीं, बल्कि यह सामाजिक आदर्श और मूल्य निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। भारतीय ज्ञान परंपरा के मुख्य तत्व जैसे- योग, ध्यान, भारतीय साहित्य, तर्क और संवाद परंपरा इत्यादि कौशल प्रशिक्षण में शामिल होकर शिक्षक शिक्षा को और अधिक मूल्य उन्मुख बनाते हैं। अध्ययन में उन समस्याओं एवं चुनौतियां पर भी प्रकाश डाला गया है जो आधुनिक विकास और वैश्वीकरण के क्रम में मूल्य क्षरण का कारण बनती है। भारतीय ज्ञान प्रणाली के आलोक में शिक्षक शिक्षा का अविरल विकास न केवल भारत के लिए बल्कि संपूर्ण विश्व के शिक्षा विमर्श के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण एवं लाभदाई है| यह अध्ययन इस बात पर भी बल देता है कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य केवल कौशल विकास नहीं अपितु अध्यात्म, नैतिकता, बौद्धिक विकास और सामाजिक उत्तरदायित्वों का समन्वय होना चाहिए।
मुख्य बिंदु: भारतीय ज्ञान प्रणाली, मूल्य-आधारित शिक्षा, शिक्षक शिक्षा संस्थान, गुरुकुल परंपरा, आधुनिक शिक्षक प्रशिक्षण, शिक्षा दर्शन, नैतिकता
How to cite: Gurung, N. & Pandey, S. (2026). गुरुकुल से ग्लोबल तक: भारतीय ज्ञान प्रणाली के आलोक में शिक्षक शिक्षा और मूल्य-आधारित शिक्षा का सतत् विकास. Anubodhan, 2(1), 414–422. https://doi.org/10.65885/anubodhan.v2n1.2026.039