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ANUBODHAN

A Peer Reviewed Multidisciplinary Quarterly Research Journal

अहिंसा की प्रासंगिकता: गाँधी के विशेष सन्दर्भ में

मनीषा मिश्रा

शोध छात्रा, दर्शनशास्त्र विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर

Abstract

अहिंसा की अवधारणा का वर्तमान महत्व एम० के० गाँधी जी की शिक्षाओं और आंदोलन के कारण मिलता है, जिन्हें भारत के राष्ट्रपिता के रुप में भी जाना जाता है। संकीर्ण अर्थ में गाँधी जी के अहिंसक आंदोलन को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक रणनीतिक युद्ध के रुप में देखा जा सकता है। हालाँकि, गाँधी जी की अहिंसा इससे भी कुछ अधिक है। गाँधी जी के लिए अहिंसा वह नैतिक सिद्धांत है जो मनुष्य के जीवन के सभी पहलुओं में मार्गदर्शन कर सकता है। राजनीतिक स्वतंत्रता अहिंसा के कई निहितार्थों में से केवल एक है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि अहिंसा को कभी भी किसी गुप्त लक्ष्य तक पहुँचने का साधन मात्र नहीं माना जा सकता है। अहिंसा स्वयं में एक लक्ष्य है।


बीज शब्दः अहिंसा, गाँधी

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