भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता
डॉ० मनोज कुमार द्विवेदी
सहायक ग्रंथालयी, महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर
Issue: Volume 1 No. 1 (March 2025) Anubodhan
Published: 31 March 2025
Abstract
राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता (अब कोलकाता) का इतिहास भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी स्थापना 1836 में श्री जे. एच. स्टाकलर के प्रयासों से हुई थी। प्रारंभ में यह पुस्तकालय एक निजी मकान में था, और धीरे-धीरे इसका विस्तार हुआ और यह फोर्ट विलियम कॉलेज जैसे संस्थानों से ग्रंथों की प्राप्ति के बाद विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरित होता रहा। फोर्ट विलियम कॉलेज, जो उस समय ब्रिटिश शासन के तहत एक प्रमुख शैक्षिक संस्थान था, से इस पुस्तकालय को कई महत्वपूर्ण ग्रंथ और दस्तावेज़ प्राप्त हुए। पुस्तकालय का संग्रह न केवल भारतीय साहित्य बल्कि पश्चिमी ज्ञान, इतिहास और विज्ञान से भी संबंधित था। इसके संग्रह को और समृद्ध बनाने के लिए समय-समय पर उदार व्यक्तियों और संस्थाओं ने अपनी निजी पुस्तकें और दस्तावेज़ दान किए, जो भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन, कला, और साहित्य से संबंधित थे। समय के साथ, राष्ट्रीय पुस्तकालय का ख्याति और महत्व बढ़ा, और यह एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान के रूप में स्थापित हो गया। इसकी प्रतिष्ठा ने इसे शोधकर्ताओं, विद्वानों, और आम नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण स्थल बना दिया। यह न केवल भारतीय साहित्य और संस्कृति का संरक्षण करता है, बल्कि ज्ञान के प्रसार का एक प्रमुख केंद्र भी बन गया है।
बीज शब्दः राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता, प्रकाशन, इतिहास
How to Cite: Dwivedi, M. K. (2025). भारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता. 1(1), 40–50.